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Posts Tagged ‘jasvir’

मेरे चिट्ठे पर मित्र जसवीर की मौत पर कवितायें छपी थीं और अनेक मित्रों ने पसन्द की थीं । जसवीर भाई ने अब अपना ब्लॉग ’एकला संघ’ शुरु कर दिया है । आप सब से दिली अपील है कि इस ब्लॉग पर जायें और अपनी बेबाक राय व्यक्त करें । मुझे भरोसा है कि ’एकला संघ’ का अतिशीशीघ्र एक पाठक वर्ग बन जाएगा ।

सविनय,

अफ़लातून

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एक हकीकत

मेरी लाश अभी आयी है
एक लाश और आ रही है
दूजी अधजली है
तीसरी की राख ठंडी पड़ चुकी है |
तैयारियां चल रही हैं
उस इंसानी जिस्म को फूँकने की
जिसे हम अब तक रिश्तों से बुलाते थे |

सभी इंतजार में हैं
अर्थी को चिता पर रखते
लकडियों से उस ढांचे को ढांकते
जिसमें कोई प्राण नहीं है अब |

बदबू से बचाने को
सामग्रीघीचंदन डालते

आग लगा देंगे हड्डियों के शरीर को
सर्वधर्म समभाव के शमशान घाट पर
जहॉं एक ओंकार , हे राम और ओमशांति लिखा है
क्या सत्य है ?

शायद कुछ भी नहीं

बसं यूँ ही लोग खुद को भुलाने के लिए
मंत्र दोहराते हैं जनाजे की भीड में

नारेस्ोगन की तरह
राम नाम सत्य है
सत् ?

वो था जो नाम से जाना जाता था
या यह है जिसे हम लाश कहते हैं उसकी
राम कहां से आ गया बीच में

न कभी देखा, न सुनाउसे
और सब शवयात्राओं में उसी को सत्य कहते हैं
मौत एक उत्सव है
अवसरजहॉं सब रिश्तेदारों से मुलाकात हो जाती है
जिन्हें वैसे तो फुरसत नहीं मिलती।

कोई पूछता है क्या हुआ, कब हुआ
बतातेबताते थक चुका हूँ
मन होता है कैसेट में रिकार्ड कर
उसको चला दिया करूँ
या उनसे सवाल करूँ
तुम कर क्या सकते थे
या तुम कर क्या सकते हो।

*

औपचारिकताओं के इस काल में
मौत भी एक सूचना रह गई है
और वो अगर दूर कहीं हो

तो अखबार और टी.वी. में

गिनती-संख्या ही बस।
कितने मरे , कितने दबे…….
लो एक लाश और आ गई ।

*

खून, दूध, आंसू और

लाश की राख :
सब एकसे होते हैं
हिन्दू के और मुसलमान के
आदमी के और औरत के
शहरी और गंवार वाले के
बस उनकी मात्रा ज्यादा या कम होती है
उम्र, शरीर के अनुसार |

*

किसकी शवयात्रा में
कितनी जमात/बारात
इसका भी अभिमान
कौन किस अस्पताल में मरा
और कितना खर्च करने के बाद
(या आमदनी उन डाक्टरों को कराने के बाद )

कितनी बड़ी बीमारी से हुई मौत

*

लाश गुजरते हुए
लोग किसको मत्था टेकते हैं
परमात्मा को,
उस आत्मा को,
खुद की मौत के भविष्य को
या डर लगता है उन्हें

अपनी लाश का

*

डोम

उनका पेशा है
लाशें जलाना
जैसे कसाई का जानवर काटना
जैसे वेश्या का शरीर बेचना

संवेदना सभी की होती है

पेट की भूख ही सच होती है |

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यूनिफार्म

एक-सी वर्दी पहने हुए
सड़क पर मार्च करती भीड़ के लोगों से
मुझे डर लगता है।
चाहे वह केसरिया वाले साधु हों
चाहे आर्मी के जवान
चाहे श्‍वेत साड़ी वाली बहनें
चाहे ईद पर जा रहे नमाजी
या फिर खादी वाले गांधीवादी।
न जाने कब जुनून सवार हो जाए
औरों की शामत आ जाए।

यूनिफार्म व्‍यक्तित्‍व का हनन है
और इंसान की नुमाईश
बस यह स्‍कूली बच्‍चों के लोक नृत्‍य में ही अच्‍छी लगती है।
अभी रंग-बिरंगे गंदे और मटमैले कपड़े वाले
लोग दिखे हैं
जो रिक्‍शे चला रहे हैं
जो चाय बना रहे हैं
और गुब्‍बारे बेच रहे हैं
तभी तो हौंसला बना है मुझमें
भीड़ की विपरीत दिशा में चलने का।

अबे मुन्‍ना !

छीलते रहो तुम घास खुरपी से
ताकि हमारे लॉन सुंदर बने रहें
देते रहो सब्जियों में पानी

ताकि हम उनका स्‍वाद उठा सकें
फूल उगाते रहो तुम
ताकि हम ” फ्लावर शो ” में इनाम पा सकें,
छत पर चढ़ जाया करो तुम
जब बच्‍चे हमारे क्रिकेट खेलें
ताकि गेंद वापिस लाने में देर न लगे,
हम गोल्‍फ की डंडी घुमायेंगे चहलकदमी में
गेंद उठाने तुम दौड़ते हुए जाना
तभी तो हमारी बिटिया रानी ‘ सानिया ‘ बनेगी
तुम बाल-ब्‍वाय की प्रेक्टिस करो।
ढोते रहो तुम फाइलों का बोझा सिर पर
हुसैनपुर से तिलक‍ब्रिज तक
और तिलकब्रिज से हुसैनपुर तक

ताकि हम उन पर चिडिया-बैठाते रहे
और काटते छॉंटते रहें अपनी ही लिखावट
और रेल उड़ाते रहे आकाश में।
तुम्‍हें नौकरी हमने दी है
हम तुम्‍हारे मालिक हैं
हम अपने भी मालिक हैं

तुम तो भोग रहे हो अपने कर्म
हमें तो राज करने का वर्सा मिला है
गुलामी तुम्‍हारा जन्‍म-सिद्ध फर्ज है
और अफसरी हमारा स्‍थायी हक ।

मुन्‍ना भाई-

लगे रहो
तुम हो गांधी की जमात के गंवार स्‍वदेशी
हम बढ़ते जायेंगे आगे-

नेहरू की जमात के शहरी अंग्रेज
तुम चुपचाप खाना बनाते रहो
परोसते रहो
डॉंट खाते रहो।

प्रार्थना

मन हो जिसका सच्चा

विश्‍वास हो जिसका पक्का

ईश्वर उसके साथ ही होता

हर पल उसके साथ ही होता।

1. खुद भूखा रहकर भी जो

औरों की भूख मिटाता

हृदय – सागर उसका

कभी न खाली होता।

ईश्वर उसके साथ ही होता

हर पल उसके साथ ही होता ।

2. अर्न्तवाणी सुनकर जो

काज प्रभु का करता

मुक्त रहे चिंता से

शांत सदा वो रहता।

ईश्वर उसके साथ ही होता

हर पल उसके साथ ही होता ।

3.              जीवन रहते ही जो

मौत का अनुभव करता

संसार में रहकर भी

संसार से दूरी रखता।

ईश्वर उसके साथ ही होता

हर पल उसके साथ ही होता ।

4.              अन्याय कहीं भी हो

कैसा भी हो किसी का

खुद का दाँव लगाकर

हिम्मत से जो लड़ता

ईश्वर उसके साथ ही होता

हर पल उसके साथ ही होता ।

5.              दु:ख और सुख में जो दिल

ध्यान प्रभु का रखता

दूर रहे दुविधा से

नहीं व्यापत उसमें जड़ता।

ईश्वर उसके साथ ही होता

हर पल उसके साथ ही होता ।
समर्पण

सौंप दो प्यारे प्रभु को

सब सरल हो जाएगा

जीना सहज हो जाएगा

मरना सफल हो जायेगा।

1. जिन्दगी की राह में

ऑंधियां तो आयेंगी

उसकी ही रहमत से

हमको हौसला मिल पायेगा।

2.              सोचता है हर कोई

अपने मन की बात हो

होगा जो मंजूर उसको

वक्त पर हो जाएगा।

3. मोड़ ले संसार वाले

नजरें तुमसे जिस घडी

हो यकीं तो आसरा

उसका तुम्हें मिल जाएगा।

4. माँगने से मिलता है

केवल वही जो माँगा था

कुछ न माँगो तो

खुदा खुद ही तुम्हें मिल जाएगा।

5. काटोगे फसलें वही

जैसी तुमने बोयी थी

कर्मो का चक्कर है

इससे कोई न बच पायेगा।

हमारे जमाने में यह होता था

केवल बूढ़ों की बातें ही नहीं

न ही अफसाने – किस्से

ये हो सकते हैं-

कभी चिडियों की चूँ-चूँ से हम जगते थे।

कभी बिना रूमाल मुँह पर रखे हम सांस ले सकते थे।

कभी सूरज बादलों की धुंध के पीछे नहीं छुपता था।

कभी पेड़ पर हरे पत्तो की छाया होती थी।

हाँ कभी –

हमारे जमाने की वो बात है

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