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Posts Tagged ‘पटरी व्यवसायी’

’ यह अब तक का सर्वाधिक समझदार ,सन्तुलित और नैतिक हथियार है । ’ सिर्फ़ जीवन हरण करते हुए तमाम निर्जीव इमारतों आदि को जस – का – तस बनाये रखने की विशिष्टता वाले न्यूट्रॉन बम के आविष्कारक सैमुएल कोहेन ने अपने ईजाद किए इस संहारक हथियार के बारे में यह कहा था। इस ६ दिसम्बर को उसके बेटे ने खबर दी कि उसकी कैन्सर से मृत्यु हो गई । युद्ध के बाद इमारतें जस की तस बनी रहेंगी तो निर्माण उद्योग को बढ़ावा कैसे मिलेगा ? संभवत: इसीलिए न्यूट्रॉन बम के प्रति बड़े मुल्कों में आकर्षण नहीं बना होगा । इराक के ’पुनर्निर्माण’ से अमेरिकी उपराष्ट्रपति डिक चेनी से जुड़ी कम्पनियां जुड़ी थीं , यह छिपा नहीं है ।

कल बनारस के शीतला घाट पर हुए ’ मध्यम श्रेणी के विस्फोट ’ के बाद से समस्त मीडिया का ध्यान काशी की कानून और न्याय – व्यवस्था पर है । यहां के नागरिकों और पर्यटकों के जान – माल की रक्षा में विफल जिला प्रशासन पर है ।

सैमुएल कोहेन की तरह बनारस के जिला प्रशासन ने भी एक ’समझदार ,सन्तुलित किन्तु संहारक हथियार ’ गत ढाई महीने से इस्तेमाल किया है । इस हथियार का प्रयोग बनारस के शहरी-जीवन के हाशिए पर मौजूद पटरी व्यवसाइयों पर हुआ है । इस माएने में जिला प्रशासन न्यूट्रॉन बम से भी एक दरजा ज्यादा ’समझदार’ है। वह जीवितों में भी भी गरीबों को छांट लेता है । ढाई महीने से आधा पेट खाकर लड़ रहे इन पटरी व्यवसाइयों के बीच से दो फल विक्रेता – रामकिशुन तथा दस्सी सोनकर रोजगार छीने जाने के आघात से अपनी जान गंवा चुके हैं । जिला प्रशासन की इस दमनात्मक कारगुजारी में ’रियल एस्टेट’ लॉबी तथा पुलिस बतौर गठबन्धन के शरीक है । इस गठबन्धन ने खुले रूप से एक घिनौना स्वरूप ग्रहण कर लिया है । लंका स्थित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को बनारस की सबसे चौड़ी पटरी और नगर निगम का रिक्शा स्टैण्ड उपहार स्वरूप भेंट दे दिया गया है , इसके बदले रियल एस्टेट मालिक द्वारा लंका थाना परिसर में कमरे बनवाना तथा पुताई करवाई गई है । इसी परिवार द्वारा बनाये गई बहुमंजली इमारतों में कई ’आदर्श घोटाले’ छुपे हैं ।

मुख्यधारा की मीडिया जिला प्रशासन रूपी न्यूट्रॉन बम को देखे-समझे यह भी सरल नहीं है ।

उत्तर प्रदेश में शासन कैसे चल रहा है इसका नमूना बनारस के पटरी व्यवसाइयों के ढाई महीने से चल रहे संघर्ष से समझा जा सकता है । मुख्यमन्त्री के कान-हाथ दो तीन नौकरशाह हैं । जो जिलाधिकारी इनसे तालमेल बैठा लेता है वह कोई भी अलोकतांत्रिक कदम उठा सकता है । वाराणसी नगर निगम के किसी भी अधिकारी द्वारा कोई भी आदेश न दिए जाने के बावजूद जिलाधिकारी के मौखिक आदेश का डंडा स्थानीय थानध्यक्ष के सिर पर है और थानाध्यक्ष के हाथ का डंडा पटरी व्यवसाइयों के सिर पर । गत दिनों सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पटरी पर व्यवसाय को मौलिक अधिकार का दरजा दिए जाने को भी जिलाधिकारी नजरअंदाज करते आए हैं । वाराणसी के कमीशनर को विधानसभाध्यक्ष , सत्ताधारी दल के कॉडीनेटर,शासन द्वारा नामित सभासदों द्वारा लिखितरूप से कहने को स्थानीय प्रशासन नजरअंदाज करता आया है ।सत्ताधारी दल के इन नुमाइन्दों ने स्थानीय प्रशासन को यह भी बताना उचित समझ कि अधिकांश  पटरी व्यवसाई दलित हैं । लोगों का कहना है कि इन महत्वपूर्ण सत्ता -पदों पर बैठे राजनैतिक कार्यकर्ताओं का महत्व गौण होने के पीछे स्वयं मुख्यमन्त्री का तौर तरीका है । माना जाता है कि नौकरशाह दल के नेताओं से ज्यादा चन्दा पहुंचाते हैं । लाजमी तौर पर दल के कार्यकर्ताओं का इन अफ़सरों से गौण महत्व होगा।

 

 

 

 

 

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पटरी व्यवसायी संगठन

वाराणसी

प्रति ,

श्री कौशलेन्द्र सिंह ,

महापौर – वाराणसी ।

 

विषय : पटरी व्यवसाइयों की बाबत ।

माननीय महापौर महोदय़ ,

फेरीवाले , पटरी ब्यवसाई , खोमचे वालों का नगर – जीवन में एक अहम योगदान रहा है । बनारस शहर के फेरीवाले ही १२५ वर्ष से पहले लिखे गये भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के प्रसिद्ध नाटक ’अन्धेर नगरी’ के पात्र हैं । इतने वर्षों बाद भी मानो अब भी वे अन्यायपूर्ण नीतियों के शिकार हैं । असंगठित क्षेत्र के इन व्यवसाइयों के हित में बनाई गई तमाम नीतियों तथा सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों के बावजूद नगर प्रशासन में मौजूद निहित स्वार्थी तत्वों के कारण उन्हें अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है ।

उत्तर प्रदेश में इस श्रेणी के व्यवसाइयों से कई वर्षों तक तहबाजारी वसूली जाती थी । तदुपरान्त निजी ठेकेदारों को यह काम दिया गया परन्तु फिलहाल तहबाजारी समाप्त करने के साथ ही प्रदेश सरकार ने संसद द्वारा पारित ’नगरीय फेरी वालों हेतु राष्ट्रीय नीति’ को लागू करने की घोषणा की है । इस नीति के अनुरूप नगरवासी फेरीवालों , पटरी व्यवसाइयों को नगर निगम द्वारा लाइसेंस जारी किए जाने तथा पटरी व्यवसायी संगठन के प्रतिनिधियों को नगर निगम में प्रतिनिधित्व दिए जाने की बातें हैं ।

गत १९ अक्टूबर २०१० को मा. सर्वोच्च न्यायालय ने एक अत्यन्त महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पटरी पर व्यवसाय करना मौलिक अधिकार है ।

इन नीतियों तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बावजूद नगर लंका क्षेत्र के पटरी व्यवसाइयों को गत २३ सितम्बर से जिलाधिकारी के निर्देश पर स्थानीय पुलिस व्यवसाय करने से रोक रही है तथा उत्पीडित कर रही है । यह उल्लेखनीय है कि नगर में सड़क के दोनों ओर सर्वाधिक चौड़ी बीस-बीस फुट की पटरी सिर्फ़ लंका स्थित मालवीय चौराहे से रविदास द्वार तक है । स्थान उपलब्ध होने के कारण ही रविदास गेट के निकट वर्षों तक नगर निगम का रिक्शा स्टैण्ड था । गत कुछ वर्षों में एक रियल – एस्टेट लॉबी द्वारा सड़क के दोनों ओर मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स तथा दुकानें ( बहुमंजली आवासीय भवन के पार्किंग स्पेस में ) खोल दी गई हैं । इन्हीं लोगों द्वारा महेन्द्रवी छात्रावास को खरीदने की बाबत भी सतर्कता आयोग द्वारा जांच कराई जा रही है ।

प्रदेश शासन द्वारा देश के एक बड़े उद्योगपति की फुटकर फल-सब्जी श्रृंखला को अनुमति न दिए जाने के निर्णय का भी हमें स्मरण है तथा इसे हम फुटकर व्यवसाय के हित में लिया कदम मानते हैं।

लंका पर विश्वविद्यालय के शिक्षक सड़क पर ही अपनी निजी गाड़ियां खड़ा कर बाजार करते हैं। आप से निवेदन है कि विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय से आप अनुरोध करें कि वे परिसरवासियों से गाड़ियां परिसर में रख कर पैदल लंका बाजार करने आने की अपील करें । कुछ समझदार शिक्षक ऐसा करते हैं । विश्वविद्यालय परिसर को टाउन एरिया तथा नोटिफाइड एरिया के रूप में न रख कर नगर निगम के विभिन्न वार्डों से जोड़ दिया गया इसलिए आपके द्वारा यह अनुरोध अति उपयुक्त होगा ।

आप से सविनय निवेदन है कि उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में आप वाराणसी के पटरी व्यवसाइयों द्वारा नगर निगम वाराणसी को रचनात्मक सहयोग सुनिश्चित कराने के लिए स्वयं हस्तक्षेप करेंगे ताकि नगर के इस अहम किन्तु कमजोर तबके के साथ न्याय हो सके ।

आप के सहयोग की अपेक्षा में , हम हैं :

 

 

( काशीनाथ )                         (मोहम्मद भुट्टो)                                  ( काली प्रसाद )

अध्यक्ष                                    महामन्त्री                                          उपाध्यक्ष

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