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Archive for सितम्बर, 2012

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‘इस्कीमिक हार्ट डिज़ीज़’ या हृदय-रोग में कॉलेस्ट्रॉल रक्त में बढ़ जाता है।यह धमिनियों में जम कर उनमें रुकावट पैदा कर देता है। हृदय की धमिनियों का अवरुद्ध हो जाना खतरनाक हो जाता है क्योंकि इन्ही के माध्यम से हृदय पूरे शरीर में खून पम्प करता है। हृदय की अवरुद्ध धमनियों का बेहतर इलाज उनकी ग्राफ्टिंग द्वारा बाइ-पास शल्य-क्रिया है। शहर में जाम लगा हो तो पहले ही बाई-पास पकड़ लीजिए और जाम से बच जाइए। ग्रफ्टिंग यानि इधर की स्वस्थ नस उधर लगा देना। हृदय-रोग की यह आम या मोटा-मोटी जानकारी है। बाई-पास शल्य-क्रिया के बाद भी रोगी को आजीवन कॉलेस्ट्रॉल घटाने,रक्त-चाप नियन्त्रित रखने,खून पतला करने और बीटा-ब्लॉकर्स दवाएं लेनी पड़ती हैं।

बहरहाल,हाल ही में पता चला कि कॉलेस्ट्रॉल का यह दुष्प्रभाव सिर्फ हृदय की धमनियों तक सीमित नहीं होता । मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली कैरोटिड नामक मुख्य नस भी कॉलेस्ट्रॉल की कृपा से अवरुद्ध हो सकती है और ऐसा हो जाने पर पर हार्ट-अटैक की तरह का असर हो सकता है और मृत्यु भी।

मेरे अग्रज नचिकेता कैरोटिड के जाम से पीडित थे। शीघ्र मामला पकड़ में आ गया और करोटिड का ‘जाम’ हिस्सा निकाल कर उतने भाग में कृत्रिम नस सफलता पूर्वक लगा दी गई। आशा है शीघ्र सामान्य और सक्रिय हो जायेंगे।

हमारे दादाजी हृदयाघात से पुणे के आगा खान महल में १९४२ में गिरफ्तार अवस्था में मरे थे ।उनके साथ मौजूद डॉ सुशीला नैयर ने उनके अवसान का विस्तृत विवरण लिखा है। मेरे पिताजी,भाई और मेरी बाई-पास शल्य-क्रिया हुई है। यानि मामला पुश्तैनी भी हो सकता है।हांलाकि ऊपर की दो पीढियों वाले पूर्णतयः व्यसन मुक्त थे और हम तम्बाकू के नानावतार लेते रहे हैं।खुराक में सावधानी,नियमित दवा,सुबह चलना और व्यसन-मुक्ति यह भी जरूरी है।

इस बीमारी के बारे में पहले पहल पता चला इसलिए साझा कर रहा हूं ।

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