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Archive for जुलाई, 2010

मै गोताखोर, मुझे गहरे जाना होगा,
तुम तट पर बैठ भंवर से बातें किया करो.

मै पहला खोजी नहीं अगम भवसागर का,
मुझसे पहले इसको कितनो ने थाहा है,
तल के मोती खोजे परखे बिखराए हैं,
डूबे हैं पर मिट्टी का कौल निबाहा है.

मैं भी खोजी हूं, मुझमे उनमे भेद यही,
मैं सबसे महंगे उस मोती का आशिक हूं,
जो मिला नहीं, वो पा लेने की धुन मेरी,
तुम मिला सहेजो घर की बातें किया करो
मै गोताखोर, मुझे…..

पथ पर तो सब चलते हैं, चलना पड़ता है,
पर मेरे चरण नया पथ चलना सीखे हैं,
तुम हंसो मगर मेरा विश्वास ना हारेगा,
जीने के अपने अपने अलग तरीके हैं.

जिस पथ पर कोई पैर निशानी छोड़ गया,
उस पथ पर चलना मेरे मन को रुचा नहीं,
कांटे रौदूंगा, अपनी राह बनाउंगा,

तुम फ़ूलों भरी डगर की बातें किया करो,
कोई बोझा अपने सिर पर मत लिया करो.
मै गोताखोर, मुझे…

नैनो के तीखे तीर, कुन्तलों की छांया,
मन बांध रही जो यह रंगो की डोरी है,
इन गीली गलियों मे भरमाया कौन नहीं,
यह भूख आदमी की सचमुच कमजोरी है.

पर अपने पे विजय नहीं जिसने पायी,
मैं उसको कायर कहता हूं पशु कहता हूं,
बस इसीलिए मैं वीरानो में रहता हूं,

तुम जादू भरे नगर की बातें किया करो,
जब जब हो जरा उतार और पी लिया करो
मै गोताखोर, मुझे…

पथ पर चलते उस रोज़ बहार मिली मुझे,
बोली गायक मैं तुमसे ब्याह रचाऊंगी,
ऐसा मनमौजी मिला नहीं दूजा कोई,
जग के सारे फ़ूल तुम्हारे घर ले आऊंगी,

मैं बोला मेरा प्यार, सदा तुम सुखी रहो,
मेरे मन को कोई बंधन स्वीकार नहीं,
तब से बहार से मेरा नाता टूट गया,

तुम फ़ूलों को अपनी झोली में सहेज रख लिया करो,
मुझसे केवल पतझड़ की बातें किया करो.
मै गोताखोर, मुझे…

– पं. आनंद शर्मा
बड़े भाई अशोक भार्गव द्वारा पाठ

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डॉ. लोहिया की मृत्यु के बाद एक दशक से ज्यादा समय तक समाजवादी युवजन राजनीति के एक प्रमुख स्तम्भ रहे मारकण्डे सिंह की गत दिनों कानपुर में मृत्यु हो गई । मुख्यधारा की राजनीति के इस पतनशील दौर में एक खाँटी राजनैतिक कार्यकर्ता के राजनैतिक आचरण को  कल लंका की पटरी पर आयोजित सभा में दलों के दायरे से ऊपर उठ कर वक्ताओं ने श्रद्धा के साथ याद किया । मौजूदा राजनीति की गिरावट के कारण मारकण्डे सिंह सरीखे कार्यकर्ता उसके लिए फ़िट नहीं माने गये यह कबूलने में सभी दलों के वक्ता एक मत थे ।

आम आदमी के चन्दे से राजनैतिक कार्यकर्ता का काम और सादगीपूर्ण जीवन चल सकता है इसका उदाहरण मारकण्डे सिंह थे। समाजवादी युवजन सभा और लोहिया विचार मंच के कार्यकर्ता रहे वरिष्ट पत्रकार योगेन्द्र नारायण शर्मा ने बताया कि कैसे संगठन के काम के लिए जेब में दस रुपये होने के बावजूद वे कैसे निकल पड़ते थे और इलाहाबाद,दिल्ली और कोलकाता का प्रवास कर लौटते थे । (हर यात्रा का टिकट खरीद कर)। समाजवादी जनपरिषद की राष्ट्रीय समिति के सदस्य अफ़लातून ने इस मुद्दे पर कहा कि समाज में ईमानदार राजनैतिक कार्यकर्ताओं को आर्थिक मदद करने की परम्परा जारी रहनी चाहिए ।

पिछले देढ़-दो महीनों से मारकण्डे सिंह समाजवादी किसान नेता चौधरी राजेन्द्र के साथ जैन लॉज में रह रहे थे । वे रोज सुबह कमरे और आस-पास झाड़ू लगाते और नियमित तौर पर अपने कपड़े खुद साफ़ करते । कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी की अहरौरा में हुई सभा में मंच से ५०० मीटर के बैरीकेड के बाद खड़े मारकण्डेजी सोशलिस्ट पार्टी द्वारा उसी स्थान पर आयोजित सभा को याद कर रहे थे। तब जॉर्ज मुख्य अतिथि थे और मारकण्डे सिंह मुख्य वक्ता । उन्होंने चौधरी राजेन्द्र से कहा ,’यह (राहुल) ५ से ७ मिनट बोलेगा जितना इसे सिखाया गया होगा । उससे ज्यादा बोला तब कुछ न कुछ विवादास्पद बोल जाएगा ।’

शिक्षाशास्त्री प्रोफेसर हरिकेश सिंह ने याद किया १९७० में विश्वविद्यालय छात्र संघ का अध्यक्ष रहते हुए परिसर के मेस-महाराजों और नाइयों का सम्मान समारोह आयोजित कर उन्होंने छात्रों के मन में श्रम साध्य कामों के प्रति प्रतिष्ठा पैदा की थी । सपा नेता डॉ. बहादुर सिंह यादव ने याद किया १९७७ में देहाती पृष्टभूमि से वे विश्वविद्यालय में आये तब मारकण्डे जी ने उन्हें इकाई का अध्यक्ष बनाया और प्रशिक्षित किया ।

छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष शिवकुमार ने कहा कि मौजूदा दौर की रा्जनीति में एक दशक टिक पाना एक दुष्कर कार्य है वैसे में मारकण्डे सिंह साढ़े चार दशक तक बिना भ्रष्ट हुए सक्रिय रहे यह सीखने वाली बात है ।

सभा को भाजपा के पूर्व सांसद मनोज सिन्हा और छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं जिला कांशग्रेस अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने भी सम्बोधित किया। सभा की सदारत छात्र-गार्जियन के रूप में जाने वाले समाजवादी कार्यकर्ता रामजी टंडन ने की ।

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