Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for अप्रैल 6th, 2009

हिन्दी के वरिष्ट पत्रकार और लेखक बच्चन सिंह ने चिट्ठेकारी शुरु की है । अपने चिट्ठे बेबाक ज़ुबाँ में वे न सिर्फ़ सामयिक घटनाक्रम पर अपनी अनुभवी राय व्यक्त कर रहे हैं अपितु अपनी कविता आदि सृजनात्मक लेखन के नमूने भी दे रहे हैं । उनके सम्पादकत्व में बनारस से जब स्वतंत्र भारत निकलता था तब वह उच्च श्रेणी की पत्रकारिता का नमूना था ।

” उनकी प्रकाशित कृतियां कविता/गीत- तबतक के लिए, गूंजने दो उसे, तिनका तिनका घोसला उपन्यास- ननकी, कीरतराम पत्रकार, संपादक कीरतराम, खबर की औकात, फांसी से पूर्व ( शहीद रामप्रसाद बिस्मिल पर उपन्यास), शहीद ए आजम ( शहीद भगत सिंह पर उपन्यास), शहादत (शहीद चंद्रशेखर आजाद पर उपन्यास), बंजर, कीचकाच, एक थी रूचि, कहानी- पांच लंबी कहानियां, सपाट चेहरे वाला आदमी, धर्मयुद्ध पत्रकारिता पर पुस्तकें- हिंदी पत्रकारिता के नए प्रतिमान, पराड़कर और हिंदी पत्रकारिता की चुनौतियां, हिंदी पत्रकारिता का नया स्वरुप, आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी और पत्रकारिता, पत्रकारिता का कृष्णपक्ष वैचारिकी- भारत में जातिप्रथा और दलित ब्राह्मणवाद, विश्वनाथ प्रताप सिंह – कैसे पहुंचे वोट की राजनीति तक ।” (उनके चिट्ठे से )

चिट्ठेकार मित्रों से निवेदन है कि बेबाक ज़ुबाँ पर जा कर उनके स्वागत में अपनी उपस्थिति दर्ज करायें । बच्चन सिंह की अनुभवी लेखनी से रू-ब-रू हों । इस चिट्ठे से हमें काफ़ी कुछ सीखने को मिलेगा और हिन्दी चिट्ठेकारी समृद्ध होगी ।

Read Full Post »

%d bloggers like this: