Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for नवम्बर 15th, 2008

देव दीपावली

देव दीपावली

 

 

 

 

 

 

 

 

सांस्कृतिक टोली

सांस्कृतिक टोली

 

 

 

 

 

 

 

 

सलीम शिवालवी

सलीम शिवालवी

 

 

 

 

 

 

 

 

अंजुम सलीमी

अंजुम सलीमी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

गुरु नानक जयन्ती , कार्तिक पूर्णिमा और देवदीपावली । काशी की घाट दीप मालिकाओं से पट जाते हैं । सड़क की तरह गंगा जी में नावों और बजड़ों का भी जाम लग जाता है, उस दिन । नावों और बजड़ों का सट्टा पहले से हो जाता है । लिहाजा उस शाम के लिए ‘सामने घाट’ के बाद और अस्सी से पहले अब्दुल्लाहदा ने अपने मित्र पीताम्बर मिश्र का ऐन घाट पर स्थित ‘योग-मन्दिर’ चुना । पाकिस्तान से आई सांस्कृतिक टोली अभिभूत थी गंगा से । क्वेटा के शायर अली बाबा ताज ने अपने एक मित्र की लिखी कविता सुनाई – बामियान की बुद्ध प्रतिमा के तालिबान द्वारा ध्वंस की बाबत । फिर अपनी रचना में कहा – ‘ बात बढ़ तो सकती है,जुस्तजू से आगे भी ,बोलते रहेंगे हम,गुफ़्तगू से आगे भी’  उस रात्रि भोज के मेज़बान प्रोफेसर गजेन्द्र सिंह ( निदेशक , आयुर्विज्ञान संस्थान , का.हि.वि.वि.) का जन्मस्थान भी क्वेटा का था । विभाजन के ठीक पहले गजेन्द्रजी के पिता वहाँ के फौजी अस्पताल में डॉक्टर थे । रुख-ए-निलोफ़र ने एक बागी स्त्री-चेतना की रचना सुनाई । निलोफ़र स्कूली बच्चों में दृश्य कला के पाठ्यक्रम बनाने में लगी हैं और लाहौर में अध्यापन करती हैं । मेज़बानों की ओर से शायर शमीम शिवालवी और कबीर ने स्वागत में मिल्लत का आवाहन करते हुए नज़्म पढ़ी , डॉ. स्वाति ने रवीन्द्र संगीत गाया और   रामिश  ने जाल द बैण्ड का  गीत- ‘वो लमहे’ सुनाया ।

    ‘हिन्द – पाक – सफ़र-ए-दोस्ती’ पिछले २० वर्षों से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए टोलियों की यात्राएं कराने में पहल करता आया है । संगठन के सतपाल ग्रोवर पाकिस्तानी टीम के साथ पधारे थे ।

    सांस्कृतिक टोली की सबसे छोटी सदस्य ११ साल की फ़रीहा है जो हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत सीख रही है । फ़रीहा राग माधुरी में ,’मोरे मन भावे श्याम मुरारी’ सुनाती है तो स्थानीय अखबार का संवाद दाता उससे पूछता है कि वह यह पाकिस्तान में सुनाती है या नहीं ? उसको यह अन्दाज नहीं है कि वहीं सीख कर उसे यहाँ भी गा रही है ।

    इस सांस्कृतिक टोली के अगुआ शायर अंजुम सलीमी कहते हैं, ‘मैं पलट आया था दीवार पर दस्तक देकर।अब सुना है,वहाँ दरवाजा निकल आया है’ । पेन्टर रेहाना क़ाज़मी कहती हैं , ‘ सियासत से हटकर देखें तो दोनों मुल्कों की आत्मा की आवाज मिलती है ।

    बनारस में इस टोली की आगवानी डॉ. मुनीज़ा रफ़ीक खाँ और गांधी विद्या संस्थान के निदेशक प्रोफेसर दीपक मलिक ने की । टीम के सदस्यों का रात्रि विश्राम बनारस के अलग अलग परिवारों मे हुआ ।

Read Full Post »

%d bloggers like this: