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Archive for अक्टूबर 21st, 2007

हमारे साप्ताहिक पत्रों में से बहुत कम क्षुद्रता से परे रहने वाले हैं । ( इनमें स्थानीय समाचार देने वाले ‘प्रजाबन्धु’ और ‘लोकवाणी’ को अपवाद स्वरूप गिना जा सकता है ।) इन साप्ताहिकों में भरपूर खबरें रहतीं हैं परन्तु रविवार को पाठकों का मनोरंजन ही इसका मकसद होता है । मनोरंजन भी कैसा ? जो ‘ हल्का साहित्य ‘ माना जाता है , उसमें से कौन से उदाहरण दूँ ? इसके अलावा परदेशी पत्रों से उद्धरण , ऊटपटांग कहानियाँ , तथा सिनेमा – स्त्रियों के चित्र के अलावा कुछ नहीं होता । जब हम अनुकरण कर ही रहे हैं तब अच्छे का अनुकरण क्यों न करें ? ‘ मैनचेस्टर गार्डियन ‘ अनेक प्रकार से अनुकरण योज्ञ साप्ताहिक है , यह कहा जा सकता है । उसमें भरपूर खबरें होती हैं , चुनिन्दा होती हैं ,समाज , राजनीति , अर्थशास्त्र , के बारे में वर्तमान नेताओं के विचार तथा देश विदेश की घटनाओं का निष्पक्ष वर्णन होता है ; चुनिन्दा पुस्तकों की मार्गदर्शक समालोचना होती है ; शुद्ध साहित्य के एक दो लेख होते हैं ।

इस पत्र में भी कई बार जल्दबाजी में की गयी आलोचना होती है और भ्रामक खबरें भी होती हैं । लेकिन उसमें इतनी प्रामाणिकता है कि सुधार भेजने पर तुरन्त स्वीकार लिया जाता है । हिन्दुस्तान में उसके संवाददाता सिविल सर्विस के लोग रहते हैं जो उसे टेढ़े मार्ग पर ले जाते हैं परन्तु कोई भी व्यक्ति यदि सप्रमाण खण्डन प्रस्तुत करता है तो उसे भी छापा जाता है ।

समाचारों के बारे में अपने कथन का उपसंहार मैं रस्किन के उद्गार उद्धृत कर करूँगा : ” यदि कोई भी दैनिक छनी हुई शुद्ध खबरें ही देता है , जो भी नयी वस्तु उसे छापने हेतु मिले उसमें भी जो जानकारी बढ़ाने वाली हो ,जो आत्मा का पोषण करने वाली हो , उन्हें ही शुद्ध भाषा में पेश करेगा तो उसकी कमाई होगी या नहीं यह मैं नहीं जानता , परन्तु उसे पढ़ने वाले का लाभ अवश्य होगा । ”

पाठक की कमाई हो इसकी परवाह अखबारों को है क्या ?

इस भाषण के अन्य भाग :

पत्रकारीय लेखन किस हद तक साहित्य

पत्रकारिता : दुधारी तलवार : महादेव देसाई

पत्रकारिता (३) : खबरों की शुद्धता , ले. महादेव देसाई

पत्रकारिता (४) : ” क्या गांधीजी को बिल्लियाँ पसन्द हैं ? ”

पत्रकारिता (५) :ले. महादेव देसाई : ‘ उस नर्तकी से विवाह हेतु ५०० लोग तैयार ‘

पत्रकारिता (६) : हक़ीक़त भी अपमानजनक हो, तब ? , ले. महादेव देसाई

समाचारपत्रों में गन्दगी : ले. महादेव देसाई

क्या पाठक का लाभ अखबारों की चिन्ता है ?

समाचार : व्यापक दृष्टि में , ले. महादेव देसाई

रिपोर्टिंग : ले. महादेव देसाई

तिलक महाराज का ‘ केसरी ‘ और मैंचेस्टर गार्डियन : ले. महादेव देसाई

विशिष्ट विषयों पर लेखन : ले. महादेव देसाई

अखबारों में विज्ञापन , सिनेमा : ले. महादेव देसाई

अखबारों में सुरुचिपोषक तत्त्व : ले. महादेव देसाई

अखबारों के सूत्रधार : सम्पादक , ले. महादेव देसाई

कुछ प्रसिद्ध विदेशी पत्रकार (१९३८) : महादेव देसाई

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