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Posts Tagged ‘oxytone’

इस बार की लम्बी यात्रा के प्रथम चरण में रेल सफ़र में मेरे आस – पास पाँच बीज वितरक और एक बहुराष्ट्रीय बीज कम्पनी के विकास अधिकारी का आरक्षण था। उनके खाने – ‘पीने’ की जिम्मेदारी विकास अधिकारी निभा रहा था । वितरकों को अजन्ता – एलोरा घुमाने की योजना थी । वितरक , मीरजापुर , आजमगढ़ , जौनपुर और बनारस के थे । पाँचों वितरक और विकास अधिकारी एक ही जाति के थे । पूर्वी उत्तर प्रदेश , बिहार और मध्य प्रदेश में पारम्परिक रूप से जमीन कोड़ कर की जाने वाली सब्जियों की खेती और बीज का ब्यवसाय करने वाली कोईरी जाति के । ‘विकास अधिकारी’ की अन्य योग्यताओं के अलावा उसी जाति का होने के कारण निश्चित ही उसे यह नौकरी पाने में नियोक्ताओं की प्राथमिकता का लाभ मिला होगा । बीज वितरकों को यह यात्रा अच्छी बिक्री के प्रोत्साहन स्वरूप कराई जा रही थी । वितरक जब एकजुट हो कर भविष्य की यात्राओं की बाबत विकास अधिकारी से सौदेबाजी करते तब यह जरूर कहते , ‘तुम्हारे बिरादर होने के कारण ही इस कम्पनी का माल हम बेच रहे हैं ।’ इन बीज वितरकों में एक पिछले चार सालों में बीज कम्पनियों के सौजन्य से सिंगापुर , मलेशिया ,ऑस्ट्रेलिया , न्यूज़ीलैण्ड, अफ़्रीका तथा चार बार थाईलैण्ड की यात्रा कर चुका था । अन्य चार वितरकों की थाईलैण्ड यात्रा हेतु बीज बिक्री का प्रमाण तय करवाने के लिए विकास अधिकारी से सौदेबाजी की रहनुमाई लाजमी तौर पर वही वितरक कर रहा था ।
इन बीज वितरकों ने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी ( और सबसे बदमाश बीज कम्पनी ) मोन्सेन्टो ने भारत की महिको नामक कम्पनी को खरीद लिया है । लौकी की सबसे लोकप्रिय किस्म के बीज बेचने के लिए यह कम्पनी बाबा रामदेव से मिलती जुलती लिबास वाले किसी बाबा की तसवीर छाप कर कहती है – ‘ साधु – सन्तों द्वारा जिस लौकी के गुण गाए जा रहे हैं , उसे उगायें’ । बाबा रामदेव के उपदेश के कारण मेरे जैसे रोगियों और रोग-भीरुओं में लौकी की माँग अत्यधिक बढ़ गयी है ।
इसका एक अत्यन्त घातक परिणाम हुआ है । परिणाम इतना घातक है कि लौकी के बीज बेचने वाले मेरे सहयात्री बाजार से खरीद कर लौकी और बैंगन नहीं खाते । इसकी वजह उन्होंने तफ़सील से बताई । लौकी की छोटी – सी बतिया ऑक्सीटोन नामक एक सूई से रात भर में कफ़ी बढ़ जाती है । ऑक्सीटोन दुधारू पशुओं और शिशु – जन्म के समय प्रसूता को भी लगाया जाता है परन्तु प्रत्येक स्थिति में इसका परिणाम घातक है इसलिए यह प्रतिबन्धित है । बावजूद प्रतिबन्ध के यह सूई बीज वितरकों की दुकानों में उपलब्ध होती है ।
इसी प्रकार बैंगन की जड़ में दी जाने वाली दवा कार्बोफ्यूरॉन का एक अन्य प्रयोग काफ़ी लोकप्रिय हो गया है । इस वजह से आँखों की रोशनी छीन लेने वाली इस प्रतिबन्धित दवा की बिक्री भी अत्यधिक बढ़ जाती है । बैंगन को कार्बोफ्यूरॉन के घोल में डुबा कर निकाल देने पर उस पर एक चमक आ जाती है और उसका रंग चटक जाता है ।
बड़ी बीज कम्पनियों की लूट और स्थानीय किस्मों को संरक्षित करने के विषय में मेरी इन लोगों से चर्चा हुई । मैंने बताया कि हमें अनुमान था कि बहुराष्ट्रीय बीज कम्पनियों के खिलाफ उनकी बिरादरी के बीज व्यवसायी और किसान सबसे अधिक जागरूक होंगे ।
सबसे उम्रदराज बीज वितरक ने सब्जी की नई किस्मों ( देश भर में किसान इन्हें डंकेल किस्म ही कहते हैं ) के बारे में एक समाजशास्त्रीय वक्तव्य दिया ।

-’ जौनपुरी विशाल मूली , बड़े-बड़े कोहड़े आदि डंकेल के इस दौर में सूक्ष्म रूप धारण कर रहे हैं चूँकि परिवार भी संयुक्त से एकल होते जा रहे हैं ।

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