इस चिट्ठे पर प्रस्तुत गत एक वर्ष की सभी प्रविष्टियों की सूची नीचे दे रहा हूँ :

कविता/कवि

काशी विश्वविद्यालय : राजेन्द्र राजन , पूर्णकालिक कवि-कार्यकर्ता : ज्ञानेन्द्रपति , कवि ज्ञानेन्द्रपति से वार्ता : बौद्धिक सृजन का काम जारी रहना चाहिए , कवि ज्ञानेन्द्रपति से वार्ता (२) , कवि ज्ञानेन्द्रपति का ‘पहल’ द्वारा सम्मान,एक कविता , आभासी नाता , राजा की शान , उदयप्रकाश , बुखार पर्व उर्फ़ आस्था के सवाल के सबसे ऊँचे तापमान पर - राजेन्द्र राजन , खेसाड़ी दाल की तरह निन्दित : ज्ञानेन्द्रपति , पहला नशा ,पहला खुमार , अशोक सेक्सरिया की दो कवितायें , हर लमहा ख़बरदार है अखबारनवीसी : सलीम शिवालवी , ‘मेला लगेगा यहाँ पर..’ : दुष्यन्त कुमार ,

 

लोहिया

हिन्दू बनाम हिन्दू : डॉ. राममनोहर लोहिया , हिन्दू बनाम हिन्दू (२) : डॉ. राममनोहर लोहिया , हिन्दू बनाम हिन्दू (३) : डॉ. राममनोहर लोहिया , राम , कृष्ण और शिव : राममनोहर लोहिया , लोहिया : मर्यादित , उन्मुक्त और असीमित व्यक्तित्व (२) , एक कौम : उसकी हँसी , उसके सपने ( लोहिया : ३ ) , दो माँ , दो बाप , दो नगर , दो प्रेमिकाएँ या यों कहिए अनेक ( ले. लोहिया) , देश की पूर्व – पश्चिम एकता का देव : कृष्ण (२) : डॉ . लोहिया , पटना-गया की मगध-धुरी , हस्तिनापुर-इन्द्रप्रस्थ की कुरु-धुरी : कृष्ण(३) : लोहिया , कृष्ण – कृष्णा सखा-सखी ही क्यों रहे ? : कृष्ण (४) : लोहिया ,

 

 

विविध

वसंतोत्सव , राजन की कविता ,

उपेक्षित स्थानीय निकाय , स्थानीय निकायों के अधिकारों में इजाफ़ा , गंगा , चाय बागान और काशी विश्वविद्यालय (गतांक से ) , होली : प्रह्लाद,हिरण्यकश्यप और होलिका , नारायण देसाई को मूर्तिदेवी पुरस्कार , जीना ने ताने और गालियाँ सबसे पहले सीखीं , नाम : स्फुट विचार , नाम – विचार के बहाने , ” बन्दर का दिया खाते हो ? ”  , वे जिन्दा हैं : ले. सरोजिनी नायडू , १८५७ से ७६ साल पहले ,

 

चित्र

” डाल पर इठला रहा है ,कैपिटलिस्ट “:निराला , पडोसी पंछी ,

 

चिट्ठेकारी

‘ फ़ैब इण्डिया ‘ से मेल खाते कुर्ते के बहाने , काएदे कानून समझाने लगें हैं : दुष्यन्त कुमार सावधान ! , पचखा में नारद ,दुष्यन्त के सहारे ,

4 Responses to “क्या क्या है , इस जगह”


  1. 1 tulika August 19, 2008 at 5:38 pm

    बी एच यू का नाम देखते ही आंखो के सामने पुरानी यादे फिर से ताजा हो गई… मैं बनारस की ही हूं और बीएचयू के वीकेएम से समाजशास्त्र में ऑनर्स किया है.. बीएचयू में होने वाले संपंदन में काफी भाग लिया है.. फिर वो थियेटर हो या फिर वाद विवाद हो या फिर कोई और फंक्शन…काफी गहरा जुड़ाव है मेरा बीएचयू से… फिलहाल वॉयस ऑफ इंडिया न्यूज़ चैनल में काम कर रही हूं…. मैं भी आपके ब्लॉग की सदस्य बनना चाहती हूं..और बनारस और बीएचयू से जुड़ बाते शेयर करना चाहती हूं………

  2. 2 Vivek Singh September 18, 2008 at 4:06 pm

    बी एच यू का नाम देखते या फ़िर सुनते ही एक गर्व सा महसूस होता है यद्यपि मैंने वंहा से पढ़ाई तो नही की है पर क्योंकि मैं बनारस(चंदौली) का हूँ तो अपने आप को हमेशा इसका हिस्सा समझता हूँ |आप सभी सम्मानित सदस्यों से मेरी गुजारिश है की मुझे इसके सदस्य की तरह ही समझे

  3. 3 priyanka srivastava January 12, 2009 at 1:47 pm

    mai bhu ki student hu,aurbanars se juda blog acha laga mujhe bhi join kijiye

  4. 4 ilyasg September 10, 2009 at 5:39 am

    Sharad ji namaste, mujhe aapka prastutikarn behad achcha laga.banaras ke naam se main kuch zayada hi prabhvit hon,aapko padh kar mere ek mitra ki yaad aagai” Rohit Tirpathi ” meri hi tarahan Ek Rangkarmi hain magar wo ‘Dushyant”ke param bhagat hain.magar unka andaaz bhi aap hi ki tarahn hain, aapke bahaen jo unki yaad aaiee hai us ke liye bhi aapka bahut bhut dhanyavaad.aap ne vakaiee bhut acha likha hai kripya pranshsha sweekaar kijiye.
    aap ka
    Bechaing”


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