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समाजवादी जनपरिषद
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- आफ़्स्पा ( AFSPA ) के खिलाफ़ धरना और सभा December 12, 2009अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर समाजवादी जनपरिषद ने लंका , वाराणसी में आफ़्स्पा (Armed Forces Special Power Act, AFSPA,1958 ) के खिलाफ़ धरना एवं सभा का आयोजन किया । धरना कवियित्री एवं जुझारू कार्यकर्ता ईरोम शर्मिला चानू के साहसिक संघर्ष के दसवें साल में प्रवेश के मौके पर उनके समर्थन में रखा गया था [...] […]
- राजनीति का धंधा और धंधे की राजनीति : ले. सुनील December 9, 2009अखबार की वह खबर हैरान करने वाली थी। मैंने सोचा कि शायद छपाई की कोई गलती है या दशमलव बिन्दु इधर-उधर हो गया है। लेकिन दूसरे अखबार में भी देखा। वह सच थी। यह खबर चालू वित्त वर्ष की प्रथम छ:माही में अग्रिम आयकर जमा करने वाले शीर्षस्थ लोगों के बारे में थी। इनमें दूसरे [...] […]
- भोपाल गैस काण्ड : पच्चीस वर्ष : कवितायेँ : राजेन्द्र राजन December 1, 2009भोपाल गैस काण्ड के २५ वर्ष पूरे होने जा रहे हैं | दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी से जुड़े सवाल ज्यों के त्यों खड़े हैं | हाल ही में इस बाबत मनमोहन सिंह से जब प्रश्न किए गए तो उन्होंने इन सवालों को भूल जाने की हिदायत दी | राजेन्द्र राजन की ये कविताएं [...] […]
- आर.एस.एस , भाजपा को कुम्हला देने वाले आरोप , लेकिन कार्यवाही की सिफारिश – सिफ़र ! – सिद्धार्थ वरदराजन , डेप्युटी एडिटर – द हिन्दू द्वारा समाचार विश्लेषण November 28, 2009हिन्दुस्तानी में कहावत है – खोदा पहाड़ निकली चुहिया – लम्बे तथा कठिन रियाज के बाद जब नतीजा अपेक्षतया बहुत कम निकलता है – उन हालात में इस मुहावरे का इस्तेमाल किया जाता है । न्यायमूर्ती एम.एस. लिबर्हान ने १७ साल परिश्रम किया जिस दरमियान शुरुआती तीन माह की नियुक्ति के उनके कार्यकाल को ४० बार [...] […]
शैशव
- अल्लामा इकबाल : बच्चों के लिए (४) : एक पहाड़ और गिलहरी December 4, 2009[ राल्फ वाल्डो एमर्सन ( १८०३ - १८८२ ) द्वारा अंग्रेजीमें लिखी एक प्रसिद्ध कविता ( फ़ेबल ) का अल्लामा इक़बाल द्वारा किया गया यह तर्जुमा है । मुझे उम्मीद है कि हिन्दी जानने वाले बच्चे इसे सीखेंगे और याद कर लेंगे । ] कोई पहाड़ यह कहता था एक गिलहरी से तुझे हो शर्म तो पानी [...] […]
- अल्लामा इकबाल : बच्चों के लिए (३) : हमदर्दी December 1, 2009टहनी पे किसी शजर* की तनहा बुलबुल था कोई उदास बैठा कहता था की रात सर पे आई उड़ने चुगने में दिन गुज़ारा पहुँचूँ किसी तरह आशियाँ* तक हर चीज़ पे छा गया अन्धेरा सुनकर बुलबुल की आहो ज़ारी* जुगनू कोई पास ही से बोला हाज़िर हूँ मदद को जानो-दिल से कीड़ा हूँ अगरचे मैं ज़रा-सा क्या गम है जो रात है अंधेरी मैं राह में [...] […]
- अल्लामा इकबाल : बच्चो के लिए (2) : परिंदे की फ़रियाद November 30, 2009[ बचपन में स्कूल में अल्लामा इकबाल की तीन कवितायें सीखी थीं | 'जुगनू' काफी पहले दे चुका हूँ , इसी चिट्ठे पर | 'बच्चे की दुआ ' को आगाज़ में प्रस्तुत करूंगा , हालांकि तरन्नुम में जो क्लिप मिली है उसकी तर्ज जुदा है | आज यहाँ पेश है 'परिंदे की फ़रियाद ' | [...] […]
- अरविन्द चतुर्वेद का स्वागत करें November 27, 2009हिन्दी के वरिष्ट पत्रकार और कवि अरविन्द चतुर्वेद ने अपना चिट्ठा बनाया है , जनपद । अपने लम्बे साहित्यिक जीवन से चुनी हुई ढेर सारी कविताओं को उन्होंने एक ही दिन में दनादन अलग – अलग पोस्ट के रूप में प्रकाशित कर दिया है । आप सबसे निवेदन है कि अरविन्द के चिट्ठे पर जाएँ [...] […]
- एक लघु कहानी / अफ़लातून November 24, 2009हालात ने उसे पेशेवर भिखारी बना दिया होगा । उमर करीब पाँच- छ: साल। पेशे को अपनाने में दु:ख या संकोच होने की गुंजाइश ही नहीं छोड़ी थी उसकी कच्ची उमर ने । माँगने के कष्ट की शायद कल्पना ही न रही हो उसे और माँग कर न पाना भी उसके लिए उतना ही सामान्य [...] […]
सुरे-बेसुरे गीतों का ब्लॉग
- मालूम क्या किसीको, दर्दे – निहाँ हमारा / अल्लामा इक़बाल November 27, 2009सारे जहाँसे अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा ।हम बुलबुलें हैं उसकी , वह बोस्ताँ हमारा ॥ध्रु.॥गुरबतमे हों अगर हम , रहता है दिल वतनमें ।समझो वहीं हमें भी , दिल हो जहाँ हमारा ॥१॥परबत वह सबसे ऊँचा , हमसाया आसमाँका ।वह संतरी हमारा , वह पासबाँ हमारा ॥२॥गोदीमें खेलती हैं , जिसकी हजारों नदियाँ ।गुलशन है जिनके दम से , रश्के-जिनाँ हमारा ॥३॥ए आबे-रूदे-गंगा , वह दिन है याद तुझको […]
- जीवन से लम्बे हैं बन्धु , ये जीवन के रस्ते /मन्ना डे/गुलजार/आशीर्वाद/वसन्त देसाई November 21, 2009जोगी ठाकुर का लिखा गीत तरुणाई से लबरेज गाड़ीवान गा रहा है । जोगी ठाकुर ही इतना डूब के सुन रहे हैं ,उसे पता नहीं है ।स्वर - मन्ना डे , संगीत - वसन्त देसाई , बोल - गुलज़ार , फिल्म आशीर्वाद […]
- दिल नाउम्मीद तो नहीं , नाकाम ही तो है November 4, 2009आज रवि भाई ने अपने ब्लॉग पर गीत चढ़ाने वाले शौकीनों के लिए ’खुले स्रोत ’ का उपाय सोदाहरण बताया है । दो बार असफल होने के बावजूद उदास नहीं हुआ , फलस्वरूप यह उम्मीद पैदा करने वाला गीत आप सबके लिए प्रस्तुत हो सका । दिल नाकामयाब भले ही हो, नाउम्मीद न हो - आप सब के लिए यह कामना है । रवि भाई को समर्पित […]
- बदाऊँ के शालीन के मिलने की खुशी में राशिद खान October 20, 2009डॉ. शालीन कुमार सिंह अंग्रेजी भाषा के कवि हैं । एक शालीन युवा । भारत में अंग्रेजी में कविता करने वाले एक समूह से जुड़े हैं । उन्हें तबला बजाने का भी शौक है । हाल ही में इनसे तार्रुफ़ हुआ है जो दोस्ती में बदल रहा है । मेरे ब्लॉग पर छपी कुँवरनारायण की एक कविता का उन्होंने अनुवाद किया है । इस ब्लॉग पर राशिद खान के गायन की पोस्ट देख कर तपाक से शालीन बोले,’वे भी बद […]
- शुभ दीपावली : तुम अपना रंज-ओ-ग़म , अपनी परेशानी मुझे दे दो October 16, 2009तुम अपना रंज-ओ-ग़म ,अपनी परेशानी मुझे दे दो ।तुम्हें ग़म की कसम , इस दिल की वीरानी मुझे दे दो ।ये माना मैं किसी का़बिल नहीं हूँ इन निग़ाहों में ।बुरा क्या है अग़र , ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो ।मैं देखूं तो सही दुनिया तुम्हें कैसे सताती है ।कोई इनके लिए अपनी निगेबानी मुझे दे दो ।वो दिल जो मैंने माँगा था मगर गैरों ने पाया था ।बड़ी इनायत है अग़र उसकी पशेमानी मुझे दे […]
दुनिया की खबरें
- लंबी हो सकती है इंतज़ार की घड़ी December 17, 2009कोपेनहेगन जलवायु सम्मेलन के मेज़बान डेनमार्क ने कहा है कि समझौते के लिए शायद 2010 की मेक्सिको बैठक का इतंज़ार करना होगा.
- तेलंगाना पर फिर हंगामा December 17, 2009तेलंगाना और बोडोलैंड को लेकर लोकसभा में फिर हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
- इच्छामृत्यु दिए जाने पर छिड़ी बहस December 17, 2009सुप्रीम कोर्ट ने उस महिला को इच्छामृत्यु देने से जुड़ी याचिका मंज़ूर की है जिसे 36 साल से 'ब्रेन डेड' माना जा रहा है.
- ड्रोन हमले में 12 चरमपंथियों की मौत December 17, 2009अधिकारियों के अनुसार पाकिस्तान में चालक रहित विमान के हमले में 12 संदिग्ध तालेबान चरमपंथी मारे गए हैं.
- जलवायु: मनमोहन ने शर्तें रखीं December 17, 2009मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत जलवायु परिवर्तन को लेकर और क़दम उठाने को तैयार है बशर्ते धनी देश सहायता दें.
हिन्दी पढ़ने में दिक्कत तो नहीं ?
मोज़िला ब्राउसर पाठक वाले किन्ही पाठकों को यदि हिन्दी में तृटि(हृस्व इ,दीर्घ ई की) दिखती हो तो वे मोज़िला का नया मुफ़्त संस्करण डाउनलोड कर लें । समस्या दूर हो जायेगी।

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First time saw the portal of banaras & BHU related site, & found very much touching to old memories of my days spent in BHU science faculty & other places specialy Assi ghat, Bihari chaiwala, Keshav paan ki dukan etc. Still I remember the frequent gathering of SFI & AISA meetings for creativity along with most of the recent issues of that time specially agaist the privatization of educational system & ” bazarikaran” even of every thing like culture & knowledege of old indian heritage in birla hostel with sunil & Anand pradhan.
बी एच यू का नाम देखते ही आंखो के सामने पुरानी यादे फिर से ताजा हो गई… मैं बनारस की ही हूं और बीएचयू के वीकेएम से समाजशास्त्र में ऑनर्स किया है.. बीएचयू में होने वाले संपंदन में काफी भाग लिया है.. फिर वो थियेटर हो या फिर वाद विवाद हो या फिर कोई और फंक्शन…काफी गहरा जुड़ाव है मेरा बीएचयू से… फिलहाल वॉयस ऑफ इंडिया न्यूज़ चैनल में काम कर रही हूं…. मैं भी आपके ब्लॉग की सदस्य बनना चाहती हूं..और बनारस और बीएचयू से जुड़ बाते शेयर करना चाहती हूं………