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Archive for जून, 2012

तुम्हे जानना चाहिए कि हम

मिट कर फिर पैदा हो जायेंगे

हमारे गले जो घोंट दिए गए हैं

फिर से उन्हीं गीतों को गायेंगे

जिनकी भनक से

तुम्हें चक्कर आ जाता है !

तुम सोते से चौंक कर चिल्लाओगे

कौन गाता है ?

इन गीतों को तो हमने

दफना दिया था !

तुम्हें जानना चाहिए कि

लाशें दफनाई जा कर सड़ जातीं हैं

मगर गीत मिट्टी में दबाओ

तो फिर फूटते हैं

खेत में दबाये गए दाने की तरह !

- भवानीप्रसाद मिश्र .

 

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