बन्दर नहीं बनाते घर ,
घूमा करते इधर-उधर,
आ-कर करते खों-खों-खों
’रोटी हमे न देते क्यों ? ’
भान्जी और बिटिया के बचपन में यह कविता उनके बीच लोकप्रिय थी । बनारस स्टेशन के प्लैटफ़ोर्म की छत पर रात साढ़े ग्यारह बजे यह समूह सो रहा है – एक दूसरे को सहारा और संतुलन देते हुए । इन सैकड़ों लोगों के विस्थापन के पीछे का सच बहुत बड़े परिवर्तन से जुड़ा है । आज-कल बनारस स्टेशन के प्लटफोर्म पर मौजूद सैंकड़ों बन्दर पहले माल गोदाम में बसते थे । बोरियों के छेद से निकले अनाज को ग्रहण करते थे । आज-कल मालगोदाम में अनाज न के बराबर आ रहा है और उनका स्थान ले लिया है सिमेन्ट ने । सिमेन्ट की धूल से भी दिक्कत होती होगी । प्लैटफोर्म पर फल और यात्रियों द्वारा दिए गए अथवा उनसे छीने गया भोजन अभी तक सिमेन्ट नहीं हुआ है ।
उर्दू में लिखी रामायण की गज़लें राम-नवमी के मौके पर गाते हुए यह हैं एक मन्दिर के पुजारी हैं । गर्दन से झूलते , वजनी हारमोनियम का स्थान सिन्थेसाइजर ने ले लिया है ।
राजगुरु , सुखदेव और भगत सिंह को २३ मार्च १९३१ जब फाँसी हुई तब शहीदे आज़म भगत सिंह की उमर २३ वर्ष थी । राममनोहर लोहिया की उमर उसी दिन २१ वर्ष की हुई थी । उनका कोई दोस्त उन्हें जनम दिन के मौके पर दावत देना चाहता था तो वे उससे निवेदन करते ,’ आस-पास की कोई तारीख रख लो ’।
अगस्त क्रान्ति के दौ्र में जयप्रकाश नारायण के साथ उन्हें भी लाहौर के किले में रखा गया । जयप्रकाश को ’ऑगस्ट हीरो’ -या अगस्त क्रान्ति का नायक कहा गया । दोनों ही लाहौर में दी गई यातनाओं का जिक्र नहीं करते थे किन्तु तथ्य यह था कि लगातार ५-७ दिन-रात जगा कर रख उनसे पूछताछ की जाती ।
संवेदनशील पाठकों से अपील है कि इनके बारे में वे बतायें । रघुवीर सहाय जी ने दिनमान के मुखपृष्ट पर छपे चित्र की बाबत पाठकों से ऐसा ही सवाल किया था।






नहीं बता पाएंगे।
यह तो भारत की स्वतंत्रता है, जो बुढ़ा गई है.
संजय जी की टिप्पणी को दुहराता हूं यह भारत की आजादी ही है.
aapne jin jin ka zikr kiya hai ye maataashree unhin ke parivaar me se sambhav hain hon!
aap agar urdu ramaun k bare me aur jankari den to achcha lage.main saajha-sarokaar par post karna chahta hun.
कमाल का पोस्ट …..
और अब रहा कमाल की पहेलियाँ….
……………..
विलुप्त होती… …..नानी-दादी की पहेलियाँ………परिणाम….. ( लड्डू बोलता है….इंजीनियर के दिल से….)
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_24.html
लगता है कि आपके मोबाइल में कैमरा आ गया है. या फिर आपका कैमरा मोबाइल हो गया है.
मेरे पास कैनन का एक साधारण डिजिटल कैमेरा है । मेरे साथ चलने पर मोबाईल हो जाता है ।
[...] उर्दू रामायण ,राममनोहर और भारतमाता ? [...]
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