उ.प्र.चुनाव में कई मसलों की जड़ में एक व्यक्ति

चुनाव बाद दी गयी मेरी पहली त्वरित टिप्पणी पर अनूप शुक्ल ने कहा,” राहुलगांधी के बारे में जो चैनल वाले कह रहे हैं तो उनको कोई तो हीरो चाहिये ही तुरत-फ़ुरत प्रतिक्रिया करने के लिये। विस्तार से विष्लेषण कहां से करें बेचारे वे :)

मौजूदा आम चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता ने जो परिणाम दिए हैं उन्हें सरसरी तौर पर  विश्लेषित करने पर हमें तुरत-फुरत प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए एक व्यक्ति जरूर मिलता है ।

आजमगढ़ , लालगंज , जौनपुर ,फैजाबाद-अयोध्या यह चार सीटें सपा की झोली में नहीं जा पाईं।नवगठित उलेमा काउंसिल अथवा डॉ. अयूब की पार्टी मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने में सफल रहीं जिसके फलस्वरूप आजमगढ़ में भाजपा के अपराधी रमाकान्त यादव ,जौनपुर में बसपा के अपराधी प्रत्याशी धनन्जय सिंह, और लालगंज में बसपा के वरिष्ट नेता  डॉ. बलिराम की जीत हुई। नतीजो में गौरतलब है कि लालू-पासवान की तरह मुलायाम की पार्टी पूरी तरह साफ़ नहीं हुई। पिछले चुनाव से सीटें कम होने के बावजूद रुहेलखंड इलाके में सपा के पांव नहीं उखड़े । धर्मेन्द्र यादव , जया प्रदा , कौशलेन्द्र वाल्मीकी,कल्याण सिंह आदि इस इलाके के सपा के सफल प्रत्याशियों को मुलायम के चुनाव पूर्व गठजोड़ का पूरा लाभ मिला है ।

इसी गठबन्धन के कारण यदि मुलायम मध्य उत्तर प्रदेश में टिके रह पाये तो इसी की वजह से मुसलमान मतदाताओं पर उनकी पकड़ ढीली भी हुई । मेरठ और भागलपुर के दंगों के लिए , रामजनमभूमि-बाबरी मस्जिद का ताला खुलवाने तथा बाबरी मस्जिद गिराए जाने के समय केन्द्र सरकार द्वारा अस्थाई मन्दिर बनाने देने के कारण कांग्रेस से मुसलमान  स्वाभाविक तौर पर विमुख हुआ था, जिसका लाभ अब तक सपा को मिलता था । सपा के इसी चुनाव पूर्व गठबन्धन के कारण कांग्रेस और बसपा मुसलिम मतों में जगह सेंधमारी कर सके ।

मुलायम सिंह यादव के इसी चुनाव पूर्व गठबन्धन के कारण मध्य उत्तर प्रदेश में भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा । भाजपा से पिछड़ा -चेहरा हट गया ।

इस प्रकार हम पाते हैं कि उत्तर प्रदेश में लोक सभा चुनाव के नतीजों के कई पहलुओं की जड़ में एक शक्सियत थी -  इस सूबे के पूर्व मुख्य मन्त्री कल्याण सिंह । इस सूबे के चुनाव में कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी से कहीं ज्यादा प्रभाव इस कद्दावर नेता का रहा ।

3 Responses to “उ.प्र.चुनाव में कई मसलों की जड़ में एक व्यक्ति”


  1. 1 दिनेशराय द्विवेदी May 17, 2009 at 1:48 pm

    उत्तरप्रदेश की राजनीति के बारे में अपना ज्ञान शून्य है जो जो भी जो कुछ कहता है वह मानना पड़ता है।

  2. 2 Abhishek May 17, 2009 at 4:38 pm

    Shayad aap sahi hon.

  3. 3 प्रवीण त्रिवेदी ...प्राइमरी का मास्टर June 18, 2009 at 10:27 pm

    अपनी अपनी सोच …..अपनी अपनी राय !!!


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