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समाजवादी जनपरिषद- खामोशी को खामोशी का सहारा / राकेश भट्ट / गांधी-मार्ग अप्रैल 22, 2013[ फारसी के विद्वान श्री राकेश भट्ट अनेक सामाजिक कामों से जुड़े रहे हैं । इन दिनों बी.बी.सी के लिए खाड़ी के मुस्लिम देशों की खबरों का विश्लेषण करते हैं । सत्य के आग्रह के कारण कोई साढ़े चार साल तक ईरान की जेलों में भी रहे हैं । भयानक घटनाएं घटी हैं , पिछले […] […]
- संगठन मंत्री साथी विक्रमा मौर्य पर प्राणघातक हमला/ साथ दीजिए मार्च 21, 2013जिलाधिकारी,मऊ। इस संदेश द्वारा मैं आज सुबह घटित एक आपराधिक घटना की ओर ध्यान दिलाना चाहता हूं।हमारे पंजीकृत राजनैतिक दल-समाजवादी जनपरिषद के प्रान्तीय संगठन मन्त्री साथी विक्रमा मौर्य अपने गांव के स्व. राजेन्द्र मौर्य की हत्या में गवाह हैं और गवाही दे चुके हैं।इस हत्या के नामजद अभियुक्तों द्वारा उन्हें गवाही न देने के लिए […] […]
- विदेशी पूंजी का महाभूत / ले. सुनील फ़रवरी 4, 2013‘‘हमने ‘गार’ के भूत का दफना दिया है। अब पूंजी निवेशकों को डरने की जरुरत नहीं है। हमने खुदरा व्यापार मंे विदेशी पूंजी को इजाजत देने और ईंधन कीमतों मंे बढ़ोत्तरी के फैसले लिए हैं, जिनसे हमारी रेटिंग घटने का खतरा नहीं रहा। इन कदमों से अब निवेशक भारत में फिर से दिलचस्पी ले रहे […] […]
- बराबरी व पारस्पिक सहयोग से बनेगा विकास का नया मॉडल: सिन्हा जनवरी 5, 2013बराबरी व पारस्परिक सहयोग से बनेगा विकास का नया मॉडल: सिन्हा हिंदी विश्वविद्यालय के 15वें स्थापना दिवस पर सच्चिदानंद सिन्हा का वक्तव्य वर्धा, 29 दिसंबर, 2012; महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के 15 वें स्थापना दिवस के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि समाजवादी चिंतक सच्चिदानंद सिन्हा ने आज शनिवार को कहा कि वैकल्पिक विकास […] […]
- जमीन से न जुड़े लोगों में उतवलापन होता है – चंचल मुखर्जी , सजप नेता नवम्बर 28, 2012समाजवादी जनपरिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष साथी विष्णुदेव गुप्त द्वारा स्थापित डॉ राममनोहर लोहिया बालिका विद्यालय , मधुबन के प्रांगण में सजप-उ.प्र राज्य समिति की बैठक दिनांक २४ नवम्बर , २०१२ को राज्य उपाध्यक्ष साथी रामछबीला साहनी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। उपस्थिति – शैलेश कुमार (वि.यु.स.,निमंत्रित),नंदकिशोर विश्वकर्मा (निमंत्रित), सदस्य- लोकनाथ मौर्य,ला […]
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शैशव- वाह ! गिलहरी क्या कहने फ़रवरी 26, 2013वाह ! गिलहरी क्या कहने ! धारीदार कोट पहने । पूंछ बड़ी-सी झबरैली, काली – पीली – मटमैली । डाली – डाली फिरती है , नहीं फिसल कर गिरती है ॥ [ चिल्ड्रेन्स बुक ट्रस्ट की 'नन्हे-मुन्नों के गीत' से … Continue reading → […]
- ‘भारतीय जनता की मां को श्रद्धांजलि / सुभाषचन्द्र बोस’ फ़रवरी 22, 2013पिछले साल किसी ने भारत सरकार से पूछा ,’भारत का कोई राष्ट्रपिता भी है ?’ अधिकारिक तौर पर जवाब मिला कि सरकार ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया। सरकार के जवाब से उत्साहित होकर कुछ लोगों ने इसका खूब प्रचार … Continue reading → […]
- दीवाली पर एक प्रार्थना : अल्लामा इक़बाल नवम्बर 13, 2012लब[1] पे आती है दुआ[2] बनके तमन्ना मेरी ज़िन्दगी शम्मा की सूरत हो ख़ुदाया मेरी दूर दुनिया का मेरे दम से अँधेरा हो जाये हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाये हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन … Continue reading → […]
- कविता / जंगल गाथा / सितम्बर 14, 2012एक नन्हा मेमना और उसकी माँ बकरी, जा रहे थे जंगल में ……राह थी संकरी। अचानक सामने से आ गया एक शेर, लेकिन अब तो हो चुकी थी बहुत देर। भागने का नहीं था कोई भी रास्ता, बकरी और मेमने … Continue reading → […]
- मेरा नया बचपन /सुभद्रा कुमारी चौहान / बाल – कविता अगस्त 16, 2012बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी॥ चिंता-रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद। कैसे भूला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद? ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था छुआछूत किसने … Continue reading → […]
- वाह ! गिलहरी क्या कहने फ़रवरी 26, 2013
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