शब्दों से ढका हुआ है सब कुछ
एक शब्द ने फूल को छिपा लिया
मैंने कहा पहाड़
एक शब्द आ खड़ा हुआ पहाड़ के आगे
मैंने कहा नदी
एक शब्द ने ढक लिया नदी को
शब्दों से अबाधित नहीं है कुछ भी
पता नहीं कब से
शब्दों से ढका हुआ है सब कुछ
ओह , पता नहीं कब से
मैं खोज रहा हूँ
शब्दों से निरावृत सौन्दर्य ।
- राजेन्द्र राजन
बस यही एक अच्छी बात है
मेरे मन में
नफरत और गुस्से की आग
कुंठाओं के किस्से
और ईर्ष्या का नंगा नाच है
मेरे मन में
अंधी ,महत्त्वाकांक्षाएं
और दुष्ट कल्पनाएं हैं
मेरे मन में
बहुत-से पाप
और भयानक वासना है
ईश्वर की कृपा से
बस यही एक अच्छी बात है
कि यह सब मेरी सामर्थ्य से परे है ।
- राजेन्द्र राजन
मेरा अंधकार
थोड़ी सी रोशनी जो मिली थी मुझे
शब्दों में बिखेर दिया मैंने उसे
मगर शब्दों से परे था मेरा अंधकार
मैं कैसे बताता कि कितना घना था मेरा अंधकार
जो कि मुझसे ही बना था
वह मेरे शब्दों से परे था
बहुत सी अंधेरी जगहों में मैं गया
पर खुद के अंधकार में
जाने की हिम्मत मौझमें नहीं थी
शायद यही था मेरा अंधकार
जो मेरे शब्दों से परे था
शब्दों से इतना परे
कुछ भी नहीं था मेरे लिए
जितना कि मेरा अंधकार ।
राजेन्द्र राजन
Tags: hindi poem, rajendra rajan


February 8, 2008 at 11:43 am |
तीसरी कविता अद्भुत है और इसमें जाने-अनजाने पहली दो कविताओं के कुछ तत्व भी समाहित हैं। राजेंद्र राजन गहरे कवि हैं। काश, कोई इनके बहुत अच्छे को इनके अच्छे से अलगाए और अलग से उसे पेश करे।
February 8, 2008 at 1:02 pm |
bhut khoobsurt hai apki kavtaye..
February 8, 2008 at 1:14 pm |
दूसरी कविता बहुत अच्छी लगी
February 8, 2008 at 5:25 pm |
तीनों कविताएं शानदार हैं . तीसरी तो अद्भुत है . अबकी दिल्ली जाऊंगा तो ज़रूर मिलूंगा इस अधिकाधिक प्रिय होते जाते कवि से .
February 8, 2008 at 8:44 pm |
बहुत अच्छी कवितायें. तीनों ही. पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.
February 9, 2008 at 9:32 am |
खूब..
शब्दों से इतना परे/कुछ भी नहीं था मेरे लिए/जितना कि मेरा अंधकार.
मेरी कहानी है? कितने-कितनों की कहानी है?
February 9, 2008 at 11:42 am |
ईश्वर की कृपा से
बस यही एक अच्छी बात है
कि यह सब मेरी सामर्थ्य से परे है ।
भैया, बहुत बहुत आभारी हूं कि ऐसे शब्द शिल्पी की रचनाएं अनायास मुहैया कराई। क्या खूब कलम पाई है राजन जी ने। इनका संग्रह है क्या ? राजन जी तक हमारा करबद्ध आभार पहुंचाएं। और आपसे तो दिल जुड़ा हुआ है , सो महसूस करें कि हम कितने खुश हैं राजनबानी पढ़ कर।
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