बताइए , मुह पर चन्द्रबिन्दु लगना चाहिए ?

    बिन्दु -> बूँद -> बिन्दी इन सब के बीच नाता है , अजित वडनेरकर कभी तफ़सील से बता सकते हैं । मेरी दिक्कत कहीं और है । एक मित्र ने कहा है : “ ’मुह’ पर चन्द्रबिन्दु लगा कर उसे ‘मुँह’ बनाओ ।” पहले मैंने मुह पर ताला जड़ लिया , फिर मेरा मुह बन आया ! मैं बाथरूम में गया और बोला ‘चाँद’ , फिर बोला ‘ख़ाद’ । दोनों अल्फ़ाज़ की गूँज सुनी । फिर ‘गूँज’  की गूँज सुनी । ‘चाँद’ और  ’गूँज’ की ध्वनि में हिमेश रेशमिया तत्व था , ‘खाद’ और ‘मुह’ में नहीं था।  मित्र ने जो कहा है वह ही बचपन से मैं भी लिखता आया हूँ ।  लेकिन बिना पता किए नाक पर कपड़ा सुखाने वाला क्लिप लगाने के लिए तैयार नहीं हूँ । मुझे विद्वान चिट्ठेकारों की राय जाननी है । जो ख़ुद को विद्वान नहीं मानते लेकिन इस विषय पर राय बना पा रहे हैं उनसे भी गुजारिश है कि राय प्रकट करें । जिन दोस्तों की राय चैटादि पर मिली है वे भी यहाँ मत प्रकट कर दें ।

6 Responses to “बताइए , मुह पर चन्द्रबिन्दु लगना चाहिए ?”

  1. Pramendra Pratap Singh Says:

    मै विद्धान तो नही हूँ किन्‍तु इतना जरूर पता है‍ कि मुँह सही है। न कि मु‍‍ह या और कुछ

  2. mamtasrivastava1 Says:

    जी बिल्कुल मुँह ऐसे ही लिखते है। बाक़ी का पता नही।
    ये एक आम से ब्लॉगर का कहना है।

  3. anuradha srivastav Says:

    बचपन से इसी तरह लिखते आ रहे हैं। सही भी यही है मुहँ।

  4. Pratik Pandey Says:

    जहाँ तक मुझे पता है, “गूंज”, “चांद” और “मुँह” सही हैं।

  5. Prabhakar Pandey Says:

    सर्वप्रथम अभिवादन स्वीकार करें। विद्वान नहीं हूँ पर राय व्यक्त कर रहा हूँ।
    1. हिन्दी में मुँह पूरी तरह से मुँह है चाहे वह व्यक्ति का मुँह हो या बोतल या फोड़े या किसी भवन या कम्प्यूटर (संगणक)का (कंप्यूटर का मुँह मेरी तरफ घुमा दीजिए)।
    2. मुह भी हिन्दी में प्रयोग हो रहा है और यह भूल-चूक से नहीं अपितु कुछ विशेष बोली के रचनाकारों द्वारा लिखा जाता रहा है कारण कि उस विशेष बोली में उसका उच्चारण मुह भी होता है । जैसे- भोजपुरी में (अबे तहार मुहवा तुरी देइव-अभी तुम्हारा मुँह तोड़ दूँगा)
    3. अगर मुह भाषा में प्रयोग हो चला है तो ठीक ही है पर हमारी कोशिश होनी चाहिए की मुह की जगह पर मुँह ही लिखे-पढ़े क्योकि मुँह पूरी तरह से सही और शुद्ध है और मुह को अभी अपना स्थान पाने में शायद बहुत समय लगे या यह प्रयोग से बाहर भी हो जाए।

  6. atulkumaar Says:

    सबसे पहले राय दे दूं कि ऊपर की अन्य टिप्पणीकारों के मुँह पर देखिए तो देखिए अनुराधा श्रीवास्तव के मुहँ पर भूलकर भी नही देखें. नहीं तो अब तक का सब चौपट हो जाएगा. वैसे अब हिन्दी में चन्द्रबिन्दु की जगह केवल अनुस्वार चलने लगा है.

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