‘ आगाज़ ‘ का खैरम कदम करें

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कल ‘यही है वह जगह’ पर एक गीत डालने की कोशिश की , सफल नहीं रहा । मनीष और विमलजी के दिशा निर्देश पर गाड़ी चली लेकिन उन दोनों के चिट्ठे वर्डप्रेस पर नहीं हैं , सो मेरी दिक्कतें उन से कैसे दूर होतीं?  कई प्रिय पाठकों को कल निराशा हुई होगी,त्रुटिपूर्ण पोस्ट देख कर । गीत प्रेमी मित्र सागर ने कहा कि उन्हें इसी समस्या की वजह से ब्लॉगर पर जाना पड़ा ।

 मैंने एक नया चिट्ठा शुरु कर दिया ‘आगाज़’ । पत्रकार विप्लव राही ने समता युवजन सभा (इस जमात से मैं भी जुड़ा था) की दीवाल - पत्रिका इसी नाम ( आगाज़ ) से शुरु की थी , अस्सी के दशक में , काशी विश्वविद्यालय में । इस चिट्ठे पर जायें ,सुनें भी। बनारस की मट्टी से जुड़ा कुछ - कुछ देने की कोशिश रहेगी।

3 Responses to “‘ आगाज़ ‘ का खैरम कदम करें”

  1. मनीष Says:

    ohh to ye problem thi. Naye chiththe ke liye badhai !

  2. अनूप शुक्ल Says:

    सुना। बढ़िया। बधाई।

  3. फुरसतिया » चिठेरी उवाच- आजा इंग्लिश सिख लें Says:

    [...] की कोशिश करे तेरा अंजाम अफ़लातून के आगाज की तरह हो।आज से तेरी-मेरी [...]

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