‘ आगाज़ ‘ का खैरम कदम करें
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कल ‘यही है वह जगह’ पर एक गीत डालने की कोशिश की , सफल नहीं रहा । मनीष और विमलजी के दिशा निर्देश पर गाड़ी चली लेकिन उन दोनों के चिट्ठे वर्डप्रेस पर नहीं हैं , सो मेरी दिक्कतें उन से कैसे दूर होतीं? कई प्रिय पाठकों को कल निराशा हुई होगी,त्रुटिपूर्ण पोस्ट देख कर । गीत प्रेमी मित्र सागर ने कहा कि उन्हें इसी समस्या की वजह से ब्लॉगर पर जाना पड़ा ।
मैंने एक नया चिट्ठा शुरु कर दिया ‘आगाज़’ । पत्रकार विप्लव राही ने समता युवजन सभा (इस जमात से मैं भी जुड़ा था) की दीवाल - पत्रिका इसी नाम ( आगाज़ ) से शुरु की थी , अस्सी के दशक में , काशी विश्वविद्यालय में । इस चिट्ठे पर जायें ,सुनें भी। बनारस की मट्टी से जुड़ा कुछ - कुछ देने की कोशिश रहेगी।
December 16, 2007 at 11:54 pm
ohh to ye problem thi. Naye chiththe ke liye badhai !
December 17, 2007 at 3:43 am
सुना। बढ़िया। बधाई।
December 17, 2007 at 10:10 pm
[...] की कोशिश करे तेरा अंजाम अफ़लातून के आगाज की तरह हो।आज से तेरी-मेरी [...]