हर लमहा ख़बरदार है अखबारनवीसी : सलीम शिवालवी

By अफ़लातून

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  सलीम शिवालवी

[ 'अखबारनवीसी' पर सलीम शिवालवी की रचना का पहला भाग मेरे एक चिट्ठे पर पिछले दिनों छपा । पहले भाग पर दो प्रतिष्ठित चिट्ठेकारों - अनामदास और प्रियंकर ने पत्रकारिता के उज्जवल पक्ष की ओर इंगित करते हुए काव्य-टिप्पणियाँ दीं । सलीम की रचना का दूसरा भाग यहाँ दिया जा रहा है । यह भी , अखबारनवीसी के उज्जवल पक्ष पर प्रकाश डालता है । ]

आवाम का हथियार है अख़बार नवीसी , आइना-ए-संसार है ,अख़बारनवीसी

ऐ अहल-ए-नज़र गौर से पढ़कर तो जरा देख,एक ख़ुद-ब-ख़ुद अख़बार है,अख़बारनवीसी॥

मैदान-ए-जंग हो , के सुलगता हुआ शहर , हर मोड़ पर बेदार है अख़बारनवीसी ।

आता है इन्हें खूब ही ख़तरों से खेलना , समझो न के लाचार है अख़बारनवीसी ॥

चूके तो गये और बचे ग़र तो कामयाब , तलवार की एक धार है अख़बारनवीसी ।

जिसको सलाम करते हैं यारों बड़े-बड़े , वो मालिक-ए-मेयार है अख़बारनवीसी ॥

अफ़सोस जब से ये कई खेमों में बँट है , तब से ही कुछ बीमार है अख़बार नवीसी ।

बे-मिस्ल बहुत काम ये अन्जाम दे गयी , तारीफ़ की हक़दार है अख़बारनवीसी ।

तारीकियाँ हों , या के के उजाला हो ऐ ‘सलीम’ , हर लमहा ख़बरदार है अख़बारनवीसी ॥

- सलीम शिवालवी.

 

4 Responses to “हर लमहा ख़बरदार है अखबारनवीसी : सलीम शिवालवी”

  1. अनूप शुक्ल Says:

    बढ़िया है।

  2. yunus Says:

    वाह इसे तो आपके ब्‍लॉग पर परमानेन्‍ट रूप से दिखाया जाना चाहिये कहीं जगह बनाकर

  3. नीलिमा Says:

    सच है खोमों में बंटकर कुछ बीमार है अख्बारनवीसी

  4. ghughutibasuti Says:

    कृपया उर्दू शब्दों का हिंदी अर्थ भी दे दिया कीजिये।
    घुघूती बासूती

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